Education News- प्राइवेट स्कूल एडमिशन लेने से नहीं कर सकते हैं मना, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

दोस्तो 28 अप्रैल 2026 का दिन भारतीय शिक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन हैं, क्योंकि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 'बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009' के तहत निजी स्कूलों में छात्रों के दाखिले के संबंध में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यह फैसला छात्रों के अधिकारों को, खासकर वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के अधिकारों को और मज़बूत करता है, आइए जानते हैं क्या हैं सुप्रीम कोर्ट का फैसला- 

1. संदिग्ध आधार पर दाखिला देने से मनाही नहीं

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि निजी स्कूल सिर्फ़ इस आधार पर छात्रों को दाखिला देने से मना नहीं कर सकते कि उन्हें छात्र की पात्रता (eligibility) पर कोई शक है। ऐसे शक किसी बच्चे के शिक्षा के अधिकार को रोकने का कारण नहीं बन सकते।

2. तत्काल दाखिला अनिवार्य

अगर राज्य सरकार द्वारा RTE एक्ट के तहत किसी छात्र को कोई सीट आवंटित की जाती है, तो स्कूल को बिना किसी देरी के उसे दाखिला देना होगा। किसी भी हाल में इस प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।

3. सत्यापन (Verification) अलग से किया जा सकता है

अगर स्कूल को पात्रता को लेकर कोई चिंता है, तो वह स्पष्टीकरण के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। 

4. लंबित विवाद कोई वैध बहाना नहीं

कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि भले ही पात्रता को लेकर कोई विवाद चल रहा हो, स्कूल उसे दाखिला देने से मना करने या उसमें देरी करने का बहाना नहीं बना सकता।